जगदीश मंदिर की रक्षा के लिए औरंगजेब के सैनिकों को दिया था करारा जवाब

महाराणा राजसिंह प्रथम की 391वीं जयंती सोमवार को मनाई जाएगी। महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के प्रशासनिक अधिकारी भूपेंद्र सिंह आउवा ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण हर साल लगने वाली प्रदर्शनी नहीं लगाई जाएगी। उत्तर मध्यकालीन युग के धर्मरक्षक, महान सैन्य संचालक और कूटनीतिज्ञ महाराणा राजसिंह प्रथम का जन्म विक्रम संवत् 1686 कार्तिक कृष्ण 2 (24 सितम्बर 1629 ई.) को हुआ था। आउवा ने बताया कि राज्यारोहण के बाद महाराणा ने सन् 1652 ई. से सन् 1680 ई. तक लगातार 28 वर्षों के शासन में मुगलों के साथ संघर्ष किया। महाराणा राजसिंह मेवाड़ के हितों को ध्यान में रखकर निरंतर अपने

राज्य को सुदृढ़ करने में लगे रहे। महाराणा राजसिंह ने मांडलगढ़, दरीबा, बनेड़ा, जहाजपुर, सावर, फूलियां, केकड़ी आदि पर पुनः अधिकार कर लिया था। राजकुमारी चारुमती ने औरंगजेब के विवाह प्रस्ताव को ठुकराकर महाराणा राजसिंह से विवाह करने का आग्रह किया। तब महाराणा ने किशनगढ़ पहुंचकर विवाह किया। इससे औरंगजेब का क्रोध मेवाड़ के प्रति बढ़ गया। औरंगजेब ने सन् 1669 ई. में मंदिर और

पाठशालाओं को तोड़ने का आदेश दिया। तब महाराणा ने जजिया लगाने का मुखर होकर विरोध किया। महाराणा ने जोधपुर के महाराजा अजित सिंह को भी संरक्षण दिया। इसके बाद औरंगजेब ने सबक सिखाने के लिए सन् 1679 ई. में सेना को जगदीश मंदिर तोड़ने की आज्ञा दी। मुगल सैनिकों ने मंदिर की अनेक प्रतिमाओं और अन्य मंदिरों को भी क्षति पहुंचाई।



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Aurangzeb's soldiers gave a befitting reply to protect Jagdish temple


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