तत्वज्ञान विद्यापीठ ठाणे को तीर्थ बनाने वाले दादाजी को किया याद

मानव कल्याण के लिए ठाणे में तत्वज्ञान विद्यापीठ स्थापित कर एक जंगम तीर्थ के रुप में विकसित करने वाले संत स्वरुप संस्थापक दादाजी पांडुरंग शास्त्री को समर्थकों ने महात्मा के रुप में याद किया। महाराष्ट्र के ठाणे स्टेशन से 6 किलोमीटर दूर घोड़बंदर रोड पर 14 एकड़ जमीन पर तत्वज्ञान विद्यापीठ फैली हुई है।

तत्वज्ञान विद्यापीठ का कार्य और कार्य प्रणाली विश्व में जितनी अद्वितीय है वैसे ही इसकी स्थापना की गाथा भी अद्भुत है। इस परिषद में विश्व के धर्मगुरुओ, चिंतकों व विचारकों ने मानव के सुखी शांत और समाधानी जीवन का विचार किया। यहां दादाजी ने धर्म के अंगों की समीक्षा करते हुए कहा कि व्यक्ति के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के लिए तो तत्वज्ञान की आवश्यकता है परंतु व्यक्ति का भौतिक जीवन सुखी बने, इसलिए भी तत्वज्ञान की आवश्यकता अधिक है। उन्होंने कृष्णम् वंदे जगद्गुरूम के विषय में बोलते हुए सिद्ध किया कि केवल भगवान कृष्ण ही जगद्गुरु कहे जा सकते हैं।

वही इस भवन के उद्घाटन में वर्ष 1958 को उपराष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के साथ भी उन्होंने धर्म संवाद किया। वही आज यहां स्नातक उत्तीर्ण छात्रों को 2 वर्ष का अनुस्नातक अभ्यासक्रम एवं जीवन प्रज्ञा विद्यालयों में 6 वर्ष का पाठ्यक्रम पूर्ण करवाया जाता है। विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा डिग्री के लिए अनुबद्ध भी करने का अनुरोध मिलने पर भी दादाजी ने नम्रता पूर्वक मना किया। यहां वैदिक तपोवन पद्धति से निशुल्क शिक्षण एवं आवास व्यवस्था से अनुभवी आचार्यों द्वारा शिक्षण कराया जाकर विद्यार्थियो को लाभांवित किया जा रहा है।

यहां के पाठ्यक्रम में भारतीय एवं पाश्चात्य तत्वज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन तर्कशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास, विचारधाराओं, रामायण, महाभारत, मानस शास्त्र समेत कई सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं जीवन स्पर्शी भाव से अध्ययन करवाया जा रहा है। वही मुंबई स्थित श्रीमद्भागवत गीता पाठशाला में दादाजी ने वर्ष 1942 से आजीवन नियमितता से विचार दिए हैं एवं उन विचारों को समाज में स्थिर करने के लिए जो विविध प्रयोग दिये है। जिनका आज भी अपने जीवन व दर्शन में विशेष महत्व है।

दादाजी की विचारधाराओं के अनुरुप आज भी यह विश्वविघालय 16 वर्ष से अधिक आयु के भाई-बहनो को शामिल कर आध्यात्मिक व प्रायोगिक ज्ञान प्रदान कर रहा है। जिसके दौरान जिज्ञासु व पारंगत तक की परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। जिसमें हर वर्ष इस परीक्षा में करीब डेढ़ लाख परीक्षार्थी सम्मिलित होते हैं। जिनकी उत्तर पुस्तिका का परीक्षण पारंगत परीक्षा पास किए हुए स्वाध्यायी करते हैं।



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