कोरोना के संक्रमण के फैलने से रोकने के लिए प्रदेश भर में 2 अक्टूबर से ‘नो मास्क नो एंट्री’ का जन आंदोलन चलाया जा रहा है। भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में भी इसका पालन शुरू किया गया है। जहां मेन गेट पर रस्सी बांधकर सुरक्षाकर्मी बिना मास्क के लोगों को अस्पताल में जाने से रोक कर इसका पालन तो करा रहे हैं, परंतु लोग इतने लापरवाह हो गए हैं कि अस्पताल में अंदर जाने के बाद खुद ही मास्क को हटाकर संक्रमण का खतरा मोल ले रहे हैं। अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों को भी परिजन कोरोना का खतरा बढ़ा रहे हैं।
हालात यह हैं कि अस्पताल के मेन गेट पर बंदूकधारी और सामान्य सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। अस्पताल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मास्क लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और फिर मास्क लगाने के बाद ही उन्हें अंदर जाने दे रहे हैं। किंतु अंदर कई लापरवाह लोग मास्क को असुविधा समझ कर हटा देते हैं।
उन्हें यह एहसास नहीं है कि कोरोना बिना मास्क पहने लोगों पर सीधा अपनी गिरफ्त में ले लेता है। अस्पताल के सर्जिकल वार्ड, मेडिकल वार्ड और हड्डी वार्ड सहित सभी वार्डों में मरीजों के बेड व उसके आस पास परिजन बिना मास्क के तो होते ही हैं, साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की पालना भी नहीं कर रहे हैं।
वार्डों में ड्यूटी दे रहे नर्सिंग स्टाफ भी मास्क लगाने के लिए नहीं बोलता है। जबकि कोविड-19 गाइड लाइनों के मुताबिक लोगों को मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करना और बार-बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोना अनिवार्य है।
सभी वार्डों में सख्ती से पालना कराई जाएगी: पीएमओ
- नो मास्क नो एंट्री की आरबीएम अस्पताल में पालना कराई जा रही है। बिना मास्क प्रवेश नहीं करने देने के सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं। परंतु यदि अस्पताल के अंदर आकर लोग मास्क हटाकर वार्डों में जाते हैं तो उन्हें रोका जाएगा। सभी वार्डों और लिफ्ट के पास पेंपलेट लगाए जाएंगे और डिस्प्ले करके लोगों को मास्क लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सभी वार्डों में सख्ती से पालना कराई जाएगी और चिकित्सा कर्मियों को भी लोगों को समझाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। - डॉ नवदीप सैनी, पीएमओ, आरबीएम अस्पताल
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